क्यूँ बन रहे हो नासमझ
कैसे करूं बयान मैं आप मेरे लिए क्या हो...
आपसे यूँ मुस्कराते बाते करना
आपके लिए यूँ सझना सँवरना
आपसे ही शरमा जाना
फिर भी बनते हो नासमझ ......
कैसे करु बयान मैं आप मेरे लिए क्या हो
आपकी देर देर राह देखना
आपसे मिलने की आस रखना
फिर भी बनते हो नासमझ.......
कैसे करू बयान मैं आप मेरे लिए क्या हो
ये महकी हवांए कुछ कहती हैं
ये चाँद तारे भी कुछ बाते कहती हैं
फिर भी बनतो हो नासमझ......
कैसे करु बयान मैं .....
आप मेरे लिए क्या हो ...
आप मेरे लिए क्या हो .......
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बहुत बढिया लिखा आपने जी ✍️🌟👌👍👍
ReplyDeleteव्वाव... अप्रतिम रचनाविष्कार ।👌👌👌
ReplyDeleteखूपच छान अप्रतिम
ReplyDeleteबहुत खूब 👌👌👌👌
ReplyDeleteBahot khub...👍✍️👌🍫
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